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  कहानी: “वो आखिरी चिट्ठी – Part 2 (फिर से शुरुआत)” ट्रेन धीरे-धीरे स्टेशन से दूर जा रही थी… नैना खिड़की के पास बैठी थी, हाथ में वो चिट्ठी… आंखों में आंसू… और दिल में तूफान। आरव प्लेटफॉर्म पर खड़ा था… लेकिन इस बार उसके चेहरे पर वो दर्द नहीं था… जो पहले था। कुछ बदल गया था… शायद वो खुद। लेकिन जैसे ही ट्रेन ने स्पीड पकड़ी… अचानक नैना का दिल जोर से धड़कने लगा। “क्या सच में यही अंत है?” उसने खुद से पूछा। उसने चिट्ठी को फिर से पढ़ा… हर शब्द जैसे उसे रोक रहा था। “कुछ प्यार… बिछड़कर पूरे होते हैं…” “नहीं…” नैना ने धीरे से कहा, “मैं इस बार अपने प्यार को अधूरा नहीं छोड़ सकती…” एक फैसला अचानक नैना उठी। “मुझे उतरना है!” उसने जोर से कहा। पास बैठे लोग चौंक गए। ट्रेन अभी पूरी तरह स्टेशन से बाहर नहीं निकली थी। वो दरवाजे की तरफ दौड़ी… और अगले ही पल… चलती ट्रेन से नीचे उतर गई। दौड़… जो सब बदल दे आरव अभी भी वहीं खड़ा था… लेकिन जाने क्यों उसके कदम हिल नहीं रहे थे। तभी पीछे से किसी ने आवाज दी — “आरव… रुको!” वो मुड़ा… नैना दौड़ती हुई उसकी तरफ आ रही थी… सांसें तेज़… आंखों में आंसू…...

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